हार मानूँगा नहीं ...!!!
एहसास हार पर
रुला जाता है कोई
उपहास हम पर
कर जाता है कोई
अकेला छोड़ कर
चला जाता है हर कोई
पर, मायूस होऊंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं..!!
ठोकरों का लग जाना
रास्तों पर गिर जाना
काँटों का चुभ जाना
क़दमों का हिल जाना
पर, राह पीछे हटूंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
आँखों में है पानी
हादसों की है निशानी
हर कदम है इक परेशानी
खुशियाँ तो हैं आनी जानी
पर, गम - ऐ- जीवन से भट्कुंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
मुझे विश्वास है
इक दिन आएगा उजाला
मेहनत - ऐ - दम ख़म से
दूर हो जाएगा अँधेरा
लाख दूर है डगर
पर, प्रयास छोडूंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
रुला जाता है कोई
उपहास हम पर
कर जाता है कोई
अकेला छोड़ कर
चला जाता है हर कोई
पर, मायूस होऊंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं..!!
ठोकरों का लग जाना
रास्तों पर गिर जाना
काँटों का चुभ जाना
क़दमों का हिल जाना
पर, राह पीछे हटूंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
आँखों में है पानी
हादसों की है निशानी
हर कदम है इक परेशानी
खुशियाँ तो हैं आनी जानी
पर, गम - ऐ- जीवन से भट्कुंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
मुझे विश्वास है
इक दिन आएगा उजाला
मेहनत - ऐ - दम ख़म से
दूर हो जाएगा अँधेरा
लाख दूर है डगर
पर, प्रयास छोडूंगा नहीं !
हार मानूंगा नहीं !!
-आशुतोष शर्मा
Ashu da mast hai...lekin iske pichhe jo inspiration hai uske bareme thoda jankari to dijiye....kya ye continuing phd ka continuing conclusion he ?
ReplyDeleteBhaiya kaafi achhi rachna hai...kahan se likhi ..!!
ReplyDeleteDhanyavaad ajay bhai..is kavita mei prerna ka mukhya srot kgp hi hai...!!
ReplyDeleteXcellent .. ashu bhai.!!..kab aa rahe ho... dilli..
ReplyDeleteNice Sir,
ReplyDeletevery much inspiring and motivational.
lakin aisa kya hua jo itni motivational kavita likh dali.
बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|
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